पिता पथरी


calculus in Gallbladder, Stone,Gallstone
पिता पथरी  gall stones,Calculus image


 पित्ते की पथरी के मरीज को यथा संभव पिता निकवाने से बचना चाहीये व इस्का निदान भारतीय जडी बूटीयो की पावर का लाभ लेने के लिए निमन्लिखित योगों का इस्तेमाल करके फ़ायदा उठाना चाहीए जिसके लिए आसान घरेलू नुस्खे नीचे लिखे जा रहे है  जिनका उपयोग करने से  इस भंयकर रोग से होने वाली परेशानी में राहत व मुकती मिल सकती है
इन दवाओ से लगातार 3 माह तक इलाज जारी रखने पर रोग से यथासंभव मुक्ति मिल जाती है।
1-नींबू  का रस 10 ग्राम की मात्रा में सुबह खाली पेट पीयें हर रोज लगातार दो सप्ताह तक पीना चाहीए यह पित्ता पथरी को गला कर बाहर निकालता है।
2- जैतून का तेल 20-25 मिली ग्राम मात्रा मे सुबह खाली पेट पीए । इसके तत्काल बाद में 100 ग्राम अंगूर का रस या निम्बू का रस 30 ग्राम पी लें । यह दवा 21 दिन तक जारी काफ़ी बढीया नतीजे मिलते हैं।
3- गाजर और ककडी का रस 100-100 ग्राम की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीते रहने से लाभ होता है।
Calculus in Gallbladder

  पथय व अप्थय-  पित्त पथरी के रोगी के भोजन में पूरी मात्रा में हरी व रेशेदार  सब्जीयां और फ़ल नियमित रुप से दें । तथा जरुरत से कम भोजन करे व सिरफ़ दो समय सादा खाना लेI
पानी - सुबह खाली पेट व रात को सोते समय गरम किया हुआ पानी पेने की आदत डाले व यथा संभव सिरफ़ गरम पानी का पर्योग करे I

अप्थय-खटी, खटाई युकत चीजें,बासी,तली-गली,मसालेदार, वसा युकत,चीजों का सखत परहेज जरुरी है।
शीतल पानी बिल्कुल ना पीएं I

कब्ज व बवासीर का इलाज

कब्ज व बवासीर का इलाज
कब्ज ,बवासीर के पूर्व का ल्क्षण होता है कब्ज होना अगर कब्ज की चेतावनी को आप नही समझ्ते हैं तो याद रखें छह माह के अन्दर-अन्दर काभी भी आपको यह बवासीर का ना-मुराद हो जाने के संकेत है
कब्ज   बवासीर का मूल कारण हमारे शरीर की आंतो की गर्मी का

बढ. जाना ओर हमारे सरीर मे पानी की कमी हो जाना है। पानी की कमी से आंतों मे खुश्की हो कर उन्मे मल सूखने लग जाता है ओर आंतो की परत से चिप जाता है   और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है कभी कभी आंतो से मल चिपक्ने से आंतो मे घाव भी हो जाते है।
बवासीर रोग को 3 भागों मे बांटा जाता है
1-कब्ज


कब्ज बवासीर से पुर्व का लक्षण होता है जिस्का मत्लब है कि आप्के सरीर मे आंतो की गर्मी बढ गई है ओर पानी की कमी है आप्को सचेत हो जाने की जरुरत है सुबह उठ्ते ही पानी पीजिए थोडी सैर हर रोज करे गर्म तासीर की चीजो का खान पान छोड दे रेशेदार फ़लो सब्जीयो का इस्तेमाल करे थोडा सरीर पर धयान दे ये रोग ठीक हो जाएगा चिन्ता की बात नही है

2--साध्य बवासीर
gas
अगर आप्ने इस रोग की प्र्थम चेताव्नी कब्ज को गंभीरता से नही लिया तो इसकी दुसरी सटेज साध्य बवासीर का सामना करने के लिये तैयार रहना होगा क्योकि कबज के कारण इसकी दूसरी अवस्था मे मल सूक कर आप्की आंतो मे जम जाने से बवासीर नामक रोग हो जाएगा जिस्के परिणाम गंभीर होते जाएंगे इस अवस्था को भी थोडे कशट के साथ ठीक किया जा सकता है जिस्मे आप्को सबसे पहले पुरी तरह कबज को ठीक करना होगा ओर कबज ठीक होने के साथ साथ बवासीर का इलाज भी करना होगा
3- कष्ट साध्य बवासीर
बवासीर के भी अन्देखा करने के बाद होने वाले रोग का नाम है कष्ट साध्य बवासीर इमे रोग तो तक्रीबान वही होता है मगर बीमारी तक्लीफ़ का दाय्ररा बड. जाता है बिमारी मे गुदा के रासते खून गिरने लग सक्ता है,मस्से भी हो सकते हैं, भगंदर भी हो सकती है  तक्लीफ़ मे बैठ्ने मे दिक्कत, चलने फ़िरने मे दिक्कत, पेट मे गैस,अफ़ारा,पेट का बढ जाना,   हाजिमा खराब हो जाना इत्यादि हो सकते है,
कब्ज व बवासीर का इलाज
धयान रखें कि एलोपैथिक दवाओ मे इस रोग का इलाज ढूंड कर समय खराब ना करें ओर ना ही आप्रेशन इस बीमारी का उप्चार है इस बीमारी का सही उप्चार तो अपने सरीर का खान पान का संतुलन बनाकर अपने घर पर ही कर सकते है जिस्के लिये नीचे कुछ आसान प्र्योग लिखे गये हैं 


1- पक हुआ (बेलपत्र फ़ल ) बिल्व फ़ल कब्ज के लिये अति श्रेष्ठ औषधि है। इस फ़ल को पानी में उबाल कर मसल लें ओर इसका रस निकालकर हर रोज 40 दिन तक लगातार पियें। इस्से बवासीर रोग के साथ साथ कबज भी ठीक जो जाती है
2- इसबगोल का भूसा कबज में बहुत गुण्कारी है 2-2 चमच सुबह शाम पानी के साथ इसबगोल सुबह  रात को सोते समय लेना फ़ायदेमंद है दस्त खुल कर होने लगता है। इसके प्र्योग से आंतो की खुशकी दूर होती है तथा आंतों की सक्रियता बढाता है मल को आंतो से चिपक्ने नही देता यह एक कुदरती रेशा है जो कुद्रत ने हमे जडी बूटीके रूप मे दिया है
कब्ज व बवासीर  
 -3 एक कप गरम पानी मे 1 चम्म्च शुध शहद मिलाकर पीने से कब्ज का रोग मिट जाता है। यह योग हर रोज दिन मे 2-3 दफ़ा पीना लगातार पीना चाहीए यह कबज के साथ साथ पूरे सरीर के लिए हित्कारी है।

4 -अलसी के बीजों को पीस्कर पावडर बना लें। एक गिलास
 पानी मे 10 ग्राम के करीब यह पावडर डाल लें और 2-3 घन्टे तक भीग्ने दें फ़िर छानकर यह पानी पी जाएं। यह कबज बवासीर तथा सरीर की खुशकी का बेहद सस्ता ओर फ़ाय्देमंद ईलाज है। अलसी में प्रचुर मात्रा मे रेशा ओमेगा फ़ेटी एसिड् वगैरा होते हैं जो कब्ज,बवासीर निवारण में भूमिका निभाते हैं।
5-  अंजीर फ़ल जिसको कुदरत ने कब्ज रोग निवारण के लिये ही बनाया है। अंजीर फ़ल जिसका आकार भी गुदा के आकार से मिलता है। अंजीर फ़ल के 5 नग ले कर रात  को मिटी के बर्तन यानी हाडी मे 2 गिलास पानी भर कर भिगो दें ये भीगे हुए अंजीर फ़ल सुबहखाली पेट निरना बासी चबा चबा कर खाएं। यह आंतो की खुशकी को दुर करर्के आंतों चीकना बनाता है सरीर मे पानी की कमी को दुर करता है  कब्ज  बवासीर का नाश करता है अंजीर फ़ल
6--अगर कबज का प्रकोप अधिक हो तो कौडतुम्बा ले कर पैरो के तल्वो मे रात को मसल लें इस्से दसत खुल कर आता है

नज़र की कमज़ोरी

आँखों के रोग

नेत्रज्योति आँखों की रोशनी  बढ़ाने के लिए
आँखों के रोग नेत्रएलो ज्योति आँखों के सभी रोगों के लिए एक उत्तम टॉनिक है इसको सुबह शाम दोनो समये आँखो मैं डालना चाहिए यह आँखों की रोशनी को बढ़ाती है ओर चस्मे का नंबर छोटा करती है धीरे धीरे चश्मा उतारा जा सकता है
इस दवा के साथ रोग अनुसार नीचे दिए किसी एक पर्योग को इस्तेमाल कर्ण चाहिए

 नज़र की कमज़ोरी
1-इन्द्रवरणा (बड़ी इन्द्रफला) के फल को काटकर अंदर से बीज निकाल दें। इन्द्रवरणा की फाँक को रात्रि में सोते समय लेटकर (उतान) ललाट पर बाँध दें। आँख में उसका पानी न जाये, यह सावधानी रखें। इस प्रयोग से नेत्रज्योति बढ़ती है।
2- त्रिफला चूर्ण को रात्रि में पानी में भीगोकर, सुबह छानकर उस पानी से आँखें धोने से नेत्रज्योति बढ़ती है।

चश्मा उतारने के लिएः
1- 7 बादाम, 5 ग्राम मिश्री और 5 ग्राम सौंफ दोनों को मिलाकर उसका चूर्ण बनाकर रात्रि को सोने से पहले दूध के साथ लेने से नेत्रज्योति बढ़ती है।
2- एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और प्रतिदिन रात्रि को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पाँच बूँद आँखों में डालकर आँखों की पुतलियों को इधर-उधर घुमायें। साथ ही पैरों के तलुए में आधे घण्टे तक घी की मालिश करें। इससे आँखों के चश्मे के नंबर उतारने में सहायता मिलती है तथा मोतियाबिंद में लाभ होता है।

रतौंधी अर्थात् रात को न दिखना (नाइट ब्लाइंडनेस)-
1- बेलपत्र का 20 से 50 मि.ली. रस पीने और 3 से 5 बूँद आँखों में आँजने से रतौंधी रोग में आराम होता है।
2-  श्याम तुलसी के पत्तों का दो-दो बूँद रस 14 दिन तक आँखों में डालने से रतौंधी रोग में लाभ होता है। इस प्रयोग से आँखों का पीलापन भी मिटता है।
3- 1 से 2 ग्राम मिश्री तथा जीरे को 2 से 5 ग्राम गाय के घी के साथ खाने से एवं लेंडीपीपर को छाछ में घिसकर आँजने से रतौंधी में फायदा होता है।
4- जीरा, आँवला  एवं कपास के पत्तों को समान मात्रा में लेकर पीसकर सिर पर 21 दिन तक पट्टी बाँधने से रतौंधी में लाभ होता है।
                                  ASSOCIATEPRODUCT LIST & PRICE HERE

योनि छोटी करने के लिए के लिए

योनि छोटी करने के लिए के लिए

पति सहवास में अति करने, अप्राकृतिक एवं असुविधापूर्ण आसनों में अति वेग के साथ सहवास करने, अति प्रसव करने और शरीर के कमजोर एवं शिथिल होने के कारण स्त्रियों का योनि मार्ग ढीला, पोला और विस्तीर्ण हो जाता है, जिससे सहवास करते समय सुख एवं आनन्द की अनुभूति नहीं होती।
very fair women
ऐसी स्थिति में प्रायः पति  सहवास क्रिया में रुचि नहीं ले पाते और कोई-कोई पति परस्त्रीगमन की ओर उन्मुख हो जाते हैं। विलासी एवं रसिक स्वभाव के पति घर की सुन्दर नौकरानियों से ही यौन संबंध कायम कर लेते हैं। इस व्याधि को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय उपयोगी एवं कारामद सिद्ध हुए हैं।
इस बीमारी से निजात पाना कोई बड़ी मुश्किल नही है अप लगतार 3 माह तक हमरी गोली नाइट पवार का तथा हिमलियान बेरी जूस का इस्तेमाल करे तथा लगाने का लिए नीचे दी गयी  कोई एक चिकित्सा करे
(1) भांग को कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। इस चूर्ण को 5-6 ग्राम (एक छोटा चम्मचभर) मात्रा में, एक महीन मलमल के साफ सफेद कपड़े पर रखकर छोटी सी पोटली बनाकर मजबूत धागे से बांध दें। धागा लम्बा रखें, ताकि धागे को खींचकर पोटली बाहर खींची जा सके। रात को सोते समय इस पोटली को पानी में डुबोकर गीली कर लें एवं योनि मार्ग में अन्दर तक सरकाकर रख लें और सुबह निकालकर फेंक दें। लाभ न होने तक यह प्रयोग जारी रखें।
(2) माजूफल का चूर्ण 100 ग्राम मोचरस का चूर्ण 50 ग्राम और लाल फिटकरी 25 ग्राम। सबको कूट-पीसकर मिलाकर रखें। पहले 20 ग्राम खड़े मूंग 3 कप पानी में खूब उबालें और बाद में छानकर इस पानी से डूश करें। एक रूई का बड़ा फाहा पानी में गीला कर निचोड़ लें और इस पर ऊपर बताया चूर्ण बुरककर यह फाहा सोते समय योनि में रखें। इन दोनों में से कोई एक प्रयोग कुछ दिन तक करने से योनि तंग और सुदृढ़ हो जाती है।
(3) मैनफल, मुलहठी और कपूर तीनों को समान मात्रा में खूब कूट-पीसकर महीन करके मिला लें और पोटली बना लें। चुटकीभर माजूफल का महीन पिसा चूर्ण जरा से शहद में मिला लें। इस लेप को अंगुली से योनि के अंदर ठीक प्रकार सब तरफ लगाकर यह पोटली सोते समय योनि के अंदर सरकाकर रख दें। प्रातः इससे निकालकर फेंक दें।
(4) कूठ, धाय के फूल, बड़ी हरड़, फिटकरी, माजूफल, लोध्र, भांग और अनार के छिलके सब 10-10 ग्राम, इन्हें कूट-पीसकर चूर्ण कर लें 250 ग्राम शराब में डालकर 7 दिन तक रखें। दिन में 2-3 बार हिला दिया करें। आठवें दिन कपड़े से छानकर शीशी में भर लें इसमें रूई का फाहा भिगोकर योनि में अंदर चारों तरफ लगाने से योनि की शिथिलता, विस्तीर्ण तथा दीर्घमुख होने की स्थिति दूर होती है। आवश्यकता रहे तब तक यह प्रयोग
करते रहना चाहिए।
यह सभी उपाय एक से बढ़कर एक हैं, एक बार में सिर्फ एक ही उपाय करें
loading...
loading Trending news...